Friday, August 21, 2009

श्रमिक खंड 1

कोटि कोटि वर्चस्व मेरा,
धरणी धरतल का मैं सुत,
अम्बर वहन किये दो कर में,
लिए खड़ा मैं ब्रह्म का पुत्र,
सृष्टि के निर्माण में बना
मैं भी सहभागी,
कहलाया धरती पर मैं,
ईश्वर का अनुगामी,
भुजाएं मेरी विशाल,
पाकर असीम बल,
तोड़ता आया हूँ मैं,
सदा पर्वत निश्छल,
उफनती नदियों को
सदा मोड़ आया हूँ मैं ,
कौंधती बिजलियों को,
सदा रौंद आया हूँ मैं,
खड़े किये हैं मैंने ही,
जाने कितने विशाल भवन,
विशाल अट्टालिकाएं सब,
मेरे ही पुरुषार्थ का फल,
कभी रूप धर किसान का मैं
अमृत मथता आया हूँ,
उपजा कर जीवनदायी अन्न,
जगत की शुधा मिटाता आया हूँ,
सागर को चीर बना कर सेतु,
किया कल्याण में हरि के हेतु,

12 comments:

  1. behad bhaari bharkam kavita...lafzon ka chunaav batata hai ki aap hindi litreture ki student hain...bahut achhi lagi aapki rachna

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  2. shramik ko vishay banaakar likhna aur uske mahatva ko siddh karne me saphal hai ye rachna..
    anukarneeya hai, waise meri hindi pe pakad utni to mazboot naheen magar phir bhi jis had tak samajh saka, yah behtareen thee..

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  3. बहुत शानदार रचना है। स्वागत है आपका।

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  4. सुन्दर प्रस्तुति ..............और आपका स्वागत हैं ..................

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  5. bahut hi acchi aur shaandar rachna .
    badhai sweekar kare ..

    vijay

    pls read my poem "jheel " on my blog : www.poemsofvijay.blogspot.com

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  6. सुंदर .बहुत अच्छा लगा पढ़ कर

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  7. ये ईश्वर का अनुगामी श्रमिक...
    ये सब करके उसकी सत्ता को चुनौती दे रहा है...

    शुभकामनाएं...

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  8. Bahut Barhia... Aapka Swagat hai...isi tarah likhte rahiye


    Ek nazar idhar bhi:

    http://hellomithilaa.blogspot.com
    Mithilak Gap...Maithili Me

    http://mastgaane.blogspot.com
    Manpasand Gaane

    http://muskuraahat.blogspot.com
    Aapke Bheje Photo

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  9. बहु सुन्दर जहान!!!!!!!!

    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  10. Very good

    Deepak "bedil'

    e


    http://ajaaj-a-bedil.blogspot.com

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